सरकार नहीं बनी तो अपने प्लान पर अमल करेगी शिवसेना: राउत

मुंबई। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर रविवार को भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस और मंगलवार को राकांपा ने अपने-अपने विधायकों की बैठक बुलाई। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की तरफ से भाजपा को सरकार गठन के लिए न्योता मिलने पर शिवसेना ने बयान दिया। पार्टी प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि भाजपा सोमवार तक सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटाने में नाकाम रहती हैतो शिवसेना अपने प्लान पर अमल करेगी। उधर, भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि शाम चार बजे सरकार बनाए जाने को लेकर पार्टी की बैठक होगी। उसके बाद अंतिम निर्णय दिया जाएगा।

राउत ने कहा, ”उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि अगर भाजपा के पास बहुमत था तो रिजल्ट आने के 24 घंटे में सरकार बनाने का दावा पेश क्यों नहीं किया। फिलहाल हमने किसी भी तरह के गठबंधन पर विचार नहीं किया है। अभी भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण दिया गया है तो हम अपने संस्कारों के हिसाब से उन्हें शुभकामनाएं देते हैं। मुझे नहीं लगता कि भाजपा सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटा पाएगी।”

”मुझे बताया गया है कि राज्यपाल ने भाजपा को 11 नवंबर को रात 8 बजे तक अपने फैसले के बारे में बताने के लिए कहा है। अगर कोई सरकार बनाने के लिए तैयार नहीं है तो शिवसेना ये जिम्मा ले सकती है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी रविवार को पार्टी के विधायकों के साथ बैठक करेंगे। कांग्रेस और राकांपा राज्य की दुश्मन नहीं है। कुछ मुद्दों पर पार्टियों में मतभेद तो होता ही है।”

हमारे नेता व्यापारी नहीं हैं। डील शब्द का अर्थ है- व्यापार यानी नफा-नुकसान। हमने किसी से कोई डील नहीं की। किसी की हिम्मत नहीं है कि शिवसेना के विधायकों को तोड़ सके।

तीन दलों केविधायकों की अलग-अलग बैठकें

महाराष्ट्र के ज्यादातर कांग्रेस विधायक जयपुर पहुंच चुके हैं।मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनके साथ बैठक की। उधर, भाजपा विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस के आवास पर पार्टी की बैठक हो रही है। मुंबई के होटल रिट्रीट में उद्धव ठाकरेशिवसेना के 56 विधायकों के साथ बैठक करेंगे।शरद पवार की पार्टी राकांपा ने भी सरकार बनाने के लिए शिवसेना के साथ आने के संकेत दिए हैं। पार्टी ने राजनीतिक स्थिति पर चर्चा के लिए 12 नवंबर कोविधायकों की बैठक बुलाई है।

राकांपा ने कहा-राज्यपाल भाजपा की खरीद-फरोख्त पर नजर रखें

राकांपा की मुंबई इकाई के अध्यक्ष नवाब मलिक ने कहा,“अगर शिवसेना सदन में भाजपा के खिलाफ वोट करती है, तो हम उसे समर्थन देने के बारे में सोच सकते हैं।अगर भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश करती है, तो सदन में फ्लोर टेस्टिंग के दौरान राकांपा उनके खिलाफ वोट करेगी। हम देखेंगे कि शिवसेना भी सरकार गिराने के लिए भाजपा के खिलाफ वोट करती है या नहीं। इसके बाद हम शिवसेना के नेतृत्व में वैकल्पिक सरकार के समर्थन के बारे में सोचेंगे। भाजपा के पास संतुलित सरकार बनाने के लिए विधायक नहीं हैं। राज्यपाल को भाजपा द्वारा शुरू की गई खरीद-फरोख्त पर भी नजर रखनी चाहिए।

शरद पवार ने सरकार में शामिल होने से इनकार किया था
राकांपा प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि बीजेपी-शिवसेना राज्य में सरकार बनाएं। हमें जनता ने विपक्ष के लिए चुना है, हम विपक्ष में ही बैठेंगे। मेरे पास अभी कहने के लिए कुछ नहीं है। भाजपा-शिवसेना को लोगों का जनादेश मिला है, इसलिए उन्हें जल्द से जल्द सरकार बनानी चाहिए। हमारा जनादेश विपक्ष की भूमिका निभाना है। पवार ने कहा- अब केवल एक ही विकल्प है कि भाजपा और शिवसेना को मिलकर सरकार बनाना चाहिए।

राज्यपाल ने भाजपा से कहा- सरकार बनाना चाहते हैं तो सूचित करें

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारीने शनिवार को विधानसभा चुनावों में सबसे बड़े दल भाजपा से कहा है कि अगर सरकार बनाना चाहते हैं तो सूचित करें। महाराष्ट्र में 24 अक्टूबर को नतीजे घोषित होने के 15 दिन बाद तक सबसे बड़े दल या गठबंधन की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया गया है। भाजपा विधायक दल के नेता देवेंद्रफडणवीस शनिवार कोराज्यपाल से मिले थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने शुक्रवार को राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दियाथा।

भाजपा के सत्ता बनाने के 4 समीकरण

1) भाजपा सदन में ध्वनिमत से बहुमत साबित करे
समीकरण: 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 105 विधायक हैं। बहुमत के लिए 145 का आंकड़ा जरूरी है। अगर भाजपा 29 निर्दलीय विधायकों को अपने साथ कर लेती है, तो उसका संख्या बल 134 का हो जाता है। बहुमत परीक्षण के दौरान ध्वनिमत से भाजपा अपना बहुमत साबित कर सकती है। 2014 में भी देवेंद्र फडणवीस सरकार ने ध्वनिमत से ही बहुमत साबित किया था। बहुमत परीक्षण के समय तक भाजपा और शिवसेना साथ नहीं थे। सत्ता गठन के कुछ समय बाद दोनों दलों का गठबंधन हो गया था।

2) भाजपा अल्पमत की सरकार बनाए
अगर भाजपा 29 निर्दलीय विधायकों को अपने साथ कर लेती है, तो उसका संख्या बल 134 का हो जाता है। ऐसे में पार्टी बहुमत के आंकड़े से 11 सीट दूर रह जाएगी। इस स्थिति में फ्लोर टेस्ट के वक्त विधानसभा से दूसरी पार्टियों के 21 विधायक अनुपस्थित रहें तो भाजपा सदन में बहुमत साबित कर लेगी। 21 विधायकों की अनुपस्थिति की स्थिति में सदन की सदस्य संख्या 267 हो जाएगी और बहुमत का जरूरी आंकड़ा 134 का हो जाएगा। ये आंकड़ा भाजपा 29 निर्दलियों की मदद से जुटा सकती है।
संभावना: भाजपा कर्नाटक में भी इसी तरीके से सरकार का गठन कर चुकी है। हालांकि, वहां पर विधायकों ने इस्तीफे दिए थे। महाराष्ट्र में नई विधानसभा बनी है और ऐसी स्थिति में विधायकों के इस्तीफे की संभावना कम है।

3) शिवसेना के 45 विधायक भाजपा के साथ आ जाएं
भाजपा सांसद संजय काकड़े ने दावा किया था कि शिवसेना के 45 विधायक उनकी पार्टी को समर्थन देना चाहते हैं। ऐसे में 56 विधायकों वाली शिवसेना से 45 विधायक टूटते हैं तो यह संख्या दो-तिहाई से ज्यादा हो जाएगी और दल-बदल कानून लागू नहीं होगा। 105 विधायकों वाली भाजपा का संख्या बल इन विधायकों की मदद से 150 पहुंच जाएगा और वह सदन में बहुमत साबित कर देगी।
संभावना: शिवसेना ने इसी समीकरण की आशंका के चलते अपने सभी विधायकों को रिजॉर्ट में रोक रखा है।

4) भाजपा-शिवसेना में गतिरोध खत्म हो
भाजपा-शिवसेना के बीच गतिरोध दूर हो जाए। इस स्थिति में भाजपा (105) और शिवसेना (56) मिलकर आसानी से बहुमत के 145 के आंकड़े को पार कर लेंगे।

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