एक बार फिर काउंसलिंग में विवादित संस्था का नाम

देहरादून। सोमवार 18 नवम्बर को होने वाली पेरमेडिक्ल व नर्सिंग की काउंसलिंग में जगत नारायन सुभारती ट्रॅस्ट का नाम भी है जबकि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट में यह हलफनामा दे चुकी है कि यह संस्था विवादीत है व राज्य के 32 एक्सपर्ट की टीम ने इस संस्था को अपने निरीक्षण में पेरामेडिकल व नर्सिंग के संचालन के लिए उपयुक्त नहीं पाया।

 

सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने शपथ पत्र दिया है कि यह संस्था विवादित है व शिक्षा को नाटक बना दिया है व फर्जीवाड़ा किया है।

 

यही नही इस संस्था के खिलाफ राज्य सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने ही फर्जीवाड़े के चलते राज्य सरकार को हुई 97 करोड़ की हानि के खिलाफ रिकवरी निकली हुई है व जिलाधिकारी देहरादून ने रिकवरी तामील करवा दी थी पर गिरफ्तारी से बचने के लिए सुभारती वाले नैनिताल हाई कोर्ट गए जहाँ एकल बेंच की अदालत ने 25 करोड़ जमा करने पर गिरफ्तारी व कुर्की रोकने के व उसके बाद ही केस सुनने के आदेश दिए थे ततपश्चात सुभारती ने एकल बेंच के आदेश को चीफ जस्टिस की डबल बेंच में चुनौती दी व मुख्य न्यायधीश की डबल बेंच ने गंभीर अपराध के चलते सिंगल बेच के आदेश को यथावत रखा था बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी 15 करोड़ जमा करने पर ही कुर्की पर रोक लगाने को आदेश दिया था जो कि सुभारती जमा करवा चुका है और बाकी अभी फैसला आने पर जमा करवाने होंगे।

 

जब इतना सब फर्जीवाड़ा हो चुका है व RTI में भी यह खुलासा हो चुका है तो किसकी मिलीभगत व शय पर दुबारा फर्जीवाड़ा की इतनी बड़ी तैयारी चल रही है ? क्या VC HNBUMU इतनी जल्दी सब भूल गए जबकिं सुभारती व अभिभावको के हर वाद में HNBUMU पक्षकार था और चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ युगल किशोर पन्त इनकीं NOC /एससेंटीएलिटी सर्टिफिकेट निरस्त कर चुके है


इतना सब जानने के बाद ठीक MBBS जैसा फर्जीवाड़ा करने की तैयारी की जा रही है जिसमे बाद में सभी छात्रो को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट करना पड़ा था । निःसंदेह बिना शाषन के अनुभाग में बैठे कर्मचारियों व हेमवती नन्दन बहुगुणा मेडिकल यूनिवर्सिटी का पहले भी नाम बदनाम कर चुके अधिकारियों के बिना सम्भव नही है और यदि उनको नाम पेरामिडकैल
रजिस्ट्रार से मिला तो उनको सारे विवादों को हवाला देकर स्पष्टीकरण मांगना चाहिए क्योंकि इस समाचार के साथ प्रकाशित निरीक्षण समिति की रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि पैरामेडिकल तो क्या फिजियोथेरेपी के लायक भी नही है।

यह संस्थान और यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है क्योंकिं पहले भी सुभारती ने कगजों का हेरफेर और फर्जीवाड़ा करके छात्रो के जीवन के 2.5 साल बर्बाद किये है जो रो रो बद्दुआए देकर राज्य के मेडीकल कॉलेजो में जीवन व्यतीत कर रहे है और अब अपनी फीस वापसी के लिए नैनिताल हाई कोर्ट में याचिका लगाए बैठे है क्योंकि सुभारती तो अपने आप को दिवालिया घोषित कर चुका है और निदेशक को जो 15 करोड़ का ड्राफ्ट दिया है उनमें लिखा है कि उसके पास पैसा नही है और उसने यह 15 करोड़ किसी अन्य संस्था में इस ट्र्स्ट को मर्ज करके पैसा लाकर दिया है।

यानी अब तो संस्था भी बदल चुकी है तो कानूनी रूप से भी NOC मिल ही नही सकती।

 

अब देखना यह कि अब कितने छात्रो व अभिभावको को पहले की भांति सुभारती फर्जीवाड़ा कर अपने जाल में फंसाता है और HNBUMU के Vc व रजिस्ट्रार क्या कार्यवाहीं करते है व शाशन क्या संज्ञान लेता है।

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