गर्भवती महिलाओं की भी होगी कोरोना जांच प्रसव से पहले
सैंपल एकत्रित करने के लिए महिला चिकित्सक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जच्चा और बच्चा को सुरक्षित रखने के लिए प्रदेश सरकार संजीदा है।
15 दिन बाद प्रसव होना तय है तो संबंधित गर्भवती महिला की कोरोना जांच होगी। शासन ने स्वास्थ्य विभाग को इसका शासनादेश जारी किया है। ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल ने शासनादेश पर अमल करते हुए तैयारी शुरू की है।
यही वजह है कि अब वे गर्भवती महिलाएं जिनको महिला चिकित्सक ने 15 दिन बाद डिलीवरी की तारीख दे रखी है, उनकी कोरोना जांच अनिवार्य कर दी गई है। ऋषिकेश सरकारी अस्पताल प्रशासन को इस बाबत दो दिन पहले शासनादेश मिला है।
अस्पताल प्रशासन ने शासनादेश को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। मामले तीन सदस्य टीम गठित की गई है, जिसमें महिला चिकित्सक, पैथोलॉजिस्ट को शामिल किया गया है।
इसकी पुष्टि करते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एनएस तोमर ने बताया कि जिन गर्भवती महिलाओं का पखवाड़ाभर बाद प्रसव होना है, उनके लिए कोरोना जांच जरूरी कर दी गई है।
डा तोमर ने बताया कि सोमवार से अस्पताल आने वाली गर्भवती महिलाओं के गले और नाक से बलगम (स्वाग) के नमूने लिए जाएंगे। जांच के लिए नमूने दून अस्पताल भेजेंगे। रिपोर्ट तीन दिन में मिलने का दावा किया
गया है।
सरकारी अस्पताल प्रशासन के मुताबिक गर्भवती महिलाओं के नमूने कोरोना जांच के लिए ऋषिकेश एम्स में भेजना तय हुआ था। अपरिहार्य कारण से एम्स प्रशासन ने फिलहाल जांच को टाल दिया है। लिहाजा अस्पताल प्रशासन ने नमूने दून अस्पताल भेजने का निर्णय लिया है।
गर्भवती महिलाओं की कोरोना जांच ओपीडी समय सुबह 8 से 2 बजे तक होगी। सोमवार से शनिवार तक जांचकी जाएगी।अस्पताल प्रशासन के मुताबिक प्रतिदिन अस्पताल में करीब 250 गर्भवती महिलाएं रुटीन चैकअप के लिए आती हैं।